Thursday , May 26 2022

पड़ोसन भाभी से सेक्स की कहानी

मेरा नाम आसिफ है. मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच है. मैं जिम जाता हूँ, जिससे शरीर भी कसरती है. मेरे लंड की साइज 7 इंच है.

मैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास खलीलाबाद सिटी का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार में अम्मी अब्बू हम दो भाई और एक बहन हैं.

हमारे पड़ोस में एक भइया भाभी हैं और इस कहानी की नायिका यही भाभी जी हैं जिनका नाम आयशा है. भइया किसी कम्पनी में जॉब करते हैं.. जिससे अक्सर ही उन्हें बाहर रहना पड़ता है. इस वजह से भाभी अकेली रहती हैं.

भाभी इतनी हॉट माल हैं कि अगर उन्हें एक बार भी कोई देख ले तो बुड्डे आदमी तक का लंड खड़ा हो जाए. मैंने तो उन्हें जब से देखा है, तब से ही फिदा हूँ और उनके नाम की रोज बेनागा मुठ मारता हूँ. वे दिखने में साउथ फिल्म की हंसिका मोटवानी की तरह लगती हैं. उनकी हाइट 5 फुट 5 इंच की है और कातिलाना फिगर 36-30-38 का है.

उनका हमारे घर से बहुत अच्छा व्यवहार है और हम लोग तकरीबन रोज मिलते हैं. हमारे बीच हंसी मजाक भी चलता था.

एक दिन मैं उनके घर गया, देखा कि उनके घर में कोई नहीं दिख रहा था. मैंने आवाज दी और भाभी को बुलाया, पर उधर से कोई आवाज नहीं आई. मैं आवाज देता हुआ जरा अन्दर को गया तो महसूस हुआ कि उनके बेडरूम से कुछ आवाज आ रही थी.

मैं चुपके से अन्दर गया और देखा कि भाभी के बेडरूम का दरवाजा पूरा बन्द नहीं था. मैं दरवाजे की झिरी से अन्दर झांक कर देखने लगा. अन्दर का नजारा देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं.

अन्दर बिस्तर पर भाभी पूरी तरह नंगी लेटी हुई थीं. वे अपने एक हाथ से अपनी एक चूची को मसल रही थीं और दूसरे हाथ से चूत में लम्बा वाला बैंगन डाल रही थीं. मैं भी वहीं खड़े खड़े लंड बाहर निकाल कर हस्तमैथुन करने लगा और अचानक ध्यान आया तो मैं जेब से मोबाइल निकालकर उनकी वीडियो भी बनाने लगा.

कुछ देर बाद जब भाभी की चुत का पानी निकल गया तो वे एकदम से निढाल सी होकर लेट गईं. तब तक मैंने भी बिना झड़ा लंड पैंट के अन्दर कर लिया और अपने घर वापस आ गया. घर आकर मैंने बाथरूम में जाकर लंड का पानी निकाला और अपने रूम में जाकर भाभी की वीडियो देखा.
मैंने मन ही मन में कहा कि अब भाभी तुमको मैं वीडियो दिखा कर चोदूँगा.

मैं इस घटना के बाद अब उन्हें घूर कर देखने लगा और मेरी इन हरकतों को भाभी ने भी नोटिस कर लिया. मुझे कुछ यूं समझ आया कि भाभी का भी मुझे देखने का नजरिया बदल गया था.

इसी तरह दस दिन बीत गए. एक दिन भाभी के घर गया, उनसे कुछ बातें हुईं.
मैंने हिम्मत करके भाभी से पूछ ही लिया- भाभी भइया घर पर नहीं रहते तो कैसे रहती हो.. क्या आपका मन नहीं करता?
भाभी समझ गईं कि मैं क्या पूछना चाहता हूँ. वे उदास सी होकर बोलीं- करता तो है.. लेकिन क्या करूं बस किसी तरह रह लेती हूँ.. और कर भी क्या लूँगी?
मैंने कहा- भाभी झूठ मत बोलिए आप कुछ तो जरूर करती हो.

उन्होंने मेरी तरफ कुछ सवालिया नजरों से देखा और कहा- क्या करती हूँ? क्या तुमने कुछ देखा है?
मैंने हां में सर हिलाया तो भाभी पूछने लगीं- क्या देखा है?
मैंने मोबाइल में वीडियो चालू करके भाभी को दे दिया. उन्होंने वीडियो देखा तो उनका चेहरा सुर्ख लाल हो गया.

भाभी सकपका कर बोलीं- तू..त..तुम.. कब आए थे?
मैंने कहा- छोड़ो भाभी आप भी प्यासी रहती हो.. उंगली और बैंगन से करती रहती हो.. मैं भी आपके नाम की मुठ मारता रहता हूँ.. क्यों न हम एक दूसरे की प्यास बुझा लें.
भाभी बोलीं कि नहीं.. मैं तुम्हारे साथ कैसे कर सकती हूँ?
मैंने कहा- क्यों नहीं कर सकती हो? लंड और चूत तो एक दूसरे की प्यास बुझाने के लिए ही होते हैं.. और लंड चूत के बीच इसके अलावा न कोई रिश्ता होता है और न ही उनका बिना एक दूसरे के कोई मतलब होता है.

भाभी चुपचाप मुझे देखने लगीं. उनकी आँखों में एक दबी हुई चाहत तो थी लेकिन एक डर भी था. यदि कुछ नहीं था.. तो वो था उनकी तरफ से कोई गुस्सा या नाराजगी.. वो सब नहीं था, जिससे मुझे हिम्मत आ गई और मैं भाभी के पास जाकर बैठ गया.

मैं धीरे से भाभी की एक जांघ हाथ फेरने लगा. भाभी ने मेरे हाथ को पकड़ के हटा दिया. आप इस कहानी को HotSexStory.Xyz में पढ़ रहे हैं।

मैंने दोबारा हाथ रखा और कहा- भाभी ज्यादा सोचो मत.. बस यूं समझ लो कि आँखें बंद हैं और जो हो रहा है, वो होने दो. आप भी प्यासी हो, मैं भी प्यासा हूँ. हमें एक दूसरे की जरूरत है. मेरा साथ दो.. रोको मत, प्लीज भाभी.. मेरे लंड की प्यास बुझा दो न.
भाभी बोलीं- ठीक है लेकिन अभी नहीं.. रात में आना.
मैं बोला- ठीक है लेकिन अभी एक किस तो दे दो न.
उन्होंने कहा- ठीक है.. ले लो और अभी चले जाओ.. रात को दस बजे आना.. हां और खाना मैं बनाऊँगी, तुम घर से खाकर मत आना.

मैंने भी भाभी को अपनी बांहों में भरा और उनके होंठों को चूम कर चला गया.

मैंने घर जाकर लंड की झाटें साफ की और रात का इंतजार करने लगा. रात 9 बजे मैं अम्मी से कहकर निकला कि दोस्त के घर जा रहा हूँ.. पार्टी है और सुबह तक आऊँगा.

अब मैं बाजार गया.. कुछ देर घूमा और दस बजे भाभी के घर आ गया. भाभी भी डिनर तैयार करके नहा कर मेरे इंतजार में बैठी थीं.

मैं भी उन्हें लाल साड़ी में देखकर कण्ट्रोल नहीं कर पाया और जल्दी से जाकर भाभी को अपनी बांहों में लेकर किस करने लगा.
भाभी हंस कर बोलीं- अभी नहीं.. पहले खाना खा लें, तब करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है.. खाना भी हो जाएगा पर थोड़ा रोमांस तो कर लेने दो.. अभी सेक्स थोड़ी कर रहा हूँ.
भाभी बोलीं- अच्छा बाबा जल्दी करो.. मुझे भूख लगी है.

हमारे बीच दस मिनट तक किस चला, फिर हम दोनों डिनर करने बैठ गए. भाभी मुझे अपने हाथ से खिला रही थीं. मैं भाभी को खिला रहा था.

खाने के बाद भाभी बोलीं- तुम रूम में बैठ कर टीवी देखो.. मैं तब तक बरतन समेट दूं.

करीब आधे घंटे के बाद भाभी टीवी वाले हॉल में आईं. दस मिनट बैठकर हम दोनों ने थोड़ी सेक्सी बातें की, फिर मैं भाभी को किस करने लगा.
भाभी- चलो रूम में चलते हैं.
मैं भाभी को उठाकर बेडरूम में ले गया. उनको बेड पर लिटा कर मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनको किस करने लगा.

हम दोनों का ये लम्बा किस 15 मिनट चला होगा. भाभी ने कहा- यही सब करोगे या और कुछ भी होगा?

मैं उनके ऊपर से उठा और भाभी के कपड़े उतार दिए. अब भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गयी थीं. मैं भाभी के 36 साइज के बूब दबाने और पीने लगा. भाभी भी गरम होकर मेरे सर को अपनी चूची पर दबाने लगीं, सिसकारी लेने लगीं.

मेरा लंड भी अब लोहे की रॉड की तरह खड़ा हो गया था. मैंने भाभी से अपने कपड़े उतारने को कहा.
वो बोलीं- क्यों तुम नहीं उतार सकते हो?
मैंने कहा- आप ही उतार दो न.

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